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दर्द की सीमा और सीमा का दर्द (सम सामयिक नारी-कविता)

समय चला पर कैसे चला पता ही नहीं चला - (लोकप्रिय कवितायेँ)

कवि एक: रंग अनेक (सलिल सरोज)

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर सखी तुम्हें बधाई...!

बापू के पथ पे चलना सीखें सखी री...! (जनहित की रामायण - 30)

इन्तहा हुई जुल्मों-सितम की - अबला को ही अस्त्रशस्त्र अब थमा दो! - आवेशवाणी