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चाँद और दीपक - सत्संग की साखियाँ

सत्गुरु से बड़ा कोई भी नहीं

प्रारब्ध कर्म और ईश्वर

भजन-सिमरन करने सेे कर्मों का भुगतान - अध्यात्म