असली काम

सूफी संत मौलाना रुम कहते हैं- हमारी स्थिति उस सेवक जैसी है जो अपने राजा के हुक्म से किसी काम के लिए किसी दूसरे मुल्क में जाता है। वो सेवक उस मुल्क में जाकर कई अद्भुत और आश्चर्यजनक काम करता है और फिर राजा के पास वापिस लौट आता है।

राजदरबार में राजा उससे पूछता है- क्या तुमने वह काम किया, जिसके लिए मैंने तुम्हें भेजा था?

सेवक ने जवाब दिया- मालिक, मैं आपका बड़ा आभारी हूं, जहां आपने मुझे भेजा था, वो एक अद्भुत स्थान है। वहां मेरी मुलाकात एक सुंदरी से हुई और मैंने उससे शादी कर ली। फिर बच्चे हुए और उनके साथ हमारी जिम्मेदारी बढ़ गई, इसलिए मैंने एक दुकान खोल ली।

राजा ने बीच में टोका और पूछा- परंतु उस काम का क्या हुआ, जिसके लिए मैंने तुम्हें भेजा था? तुमने वो काम किया या नहीं? मैंने तुम्हें शादी या बच्चे पैदा करने, धन कमाने या अन्य प्रकार के काम करने के लिए ही नहीं भेजा था।

सेवक ने शर्म से सिर झुका लिया और बोला- मालिक, मुझे अफसोस है, मैं भूल गया था।

राजा बोला- तुम वही काम क्यों भूल गए, जिसके लिए तुम्हें भेजा गया था? अब तुम्हें उसी काम के लिए दोबारा जाना होगा।

और यही कारण है कि हम बार-बार इस संसार में भेजे जाते हैं।

------ तात्पर्य ------

हमें भी परमात्मा ने किसी खास काम के लिए यह जन्म दिया है और हम उसी काम को भूल गए थे, अब सत्गुरु ने हमें सब कुछ याद दिला दिया है और समझा दिया है। अत: हमें समय रहते अपना असली काम पूरा कर लेना चाहिए‌।

हमारा एक ही मुख्य काम है, और वो है नियमित परमात्मा का भजन और सुमिरन करना और चौरासी के फेरे से हमेशा-हमेशा के लिए अपने आपको मुक्त करना और सदा के लिए परमात्मा के पास वापिस पहुंच जाना।

(स्रोत: मुफ्त में उपलब्ध जन साहित्य) 

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